A Balanced Life

Spring

बसंत का मौसम आया (Spring)

ऋतुराज बसंत सबको प्यारी लगती है। और लगे भी न क्यों, क्योंकि यह मौसम न बरसात का है और न ज्यादा ठंडी का, और न ही गर्मी का। जहाँ चारो तरफ हरा भरा, रंग बिरेंगे फूलों  प्राकृतिक सुंदरता देखने लायक होती है। इस कारन यह मौसम पूरी तरह से मनमोहक होता है। अर्थात यह सभी को सुहाना है। ख़ैर ये तो प्राकृतिक संरचना (Natural Arrangement) है जहाँ एक निर्धारित समय वर्षा ऋतू का होता है. इसी तरह शीत ऋतू का, बसंत ऋतू का फिर ग्रीष्म ऋतू का होता है। जब से मुझे जमकारी है तब से मौसम की ये प्राकृतिक संरचना जिसे हम ऋतुचक्र  जानते हैं। इसी तरह से ऋतुचक्र चलते आया है, और आगे भी  चलता रहेगा। ऐसा कभी नहीं हुआ है, कि एकाध साल वर्षा ऋतू नहीं  आया या शीत ऋतू नहीं आया, या बसंत ऋतू नहीं आया, या ग्रीष्म ऋतु नहीं आया। ये अलग बात है कि कभी कम बारिश हुई या कभी काम सर्दी लगी या काम गर्मी लगी हो। चूंकि ऋतू चक्र कुदरतीय रचना (Naturally) है। इस चक्र को बदलने का सामर्थ्य इंसान के बस में नहीं है। यदि यह इंसान के बस में होता तो , शायद वह यही चाहता कि हमेशा संतुलित मौसम याने बसंत ऋतू ही रहे। खैर ये तो मौसम की बात हो गयी। ठीक इसी तरह से यदि मैं सही कह रहा हूँ तो शायद अपने – अपने जीवन में सभी दृष्टिकोण से संतुलित जीवन जीना पसंद करेंगे या करते हैं। यह अलग बात है, कि वैसा वे जी पा रहे है या नहीं।

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